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न्यायालय की फटकार से बचने हेतु निकाले फीस वसूली के आदेश अस्पष्ट-देवनानी

न्यायालय की फटकार से बचने हेतु निकाले फीस वसूली के आदेश अस्पष्ट-देवनानी

 अजमेर हलचल।  पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने राज्य सरकार द्वारा जारी फीस वसूली आदेश को अस्पष्ट और पैचिदा बताया है। देवनानी ने कहा कि उच्च न्यायालय के डंडे से बचने के लिए सरकार ने आनन-फानन में फीस वसूली के अस्पष्ट आदेश निकाल दिए। तुरत-फुरत में निकाले गए ये आदेश अभिभावकों की समझ से तो परे हंै ही साथ ही शिक्षण संस्थानों को भी भ्रम में डाल दिया है। 
देवनानी ने कहा कि सरकार ने फीस वसूली के आदेश निकालने में आधा सत्र निकाल दिया। देरी पर देरी करने पर उच्च न्यायालय ने जब सरकार को फटकार लगाई तो हडबडी में जो आदेश निकाला वह भी आधा.अधूरा और अस्पष्ट है। इस आदेश ने अभिभावकों एवं स्कूल प्रबंधकों को भ्रमित करने का काम किया है। आदेश में ढुलमुल बात की गई है। आदेश में जहां एक तरफ कक्षा नहीं लगने के कारण कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों से शिक्षण शुल्क नहीं वसूलने की बात कही गई हैं वहीं ऑनलाइन क्लास के बदले कैपिसिटी बिल्डिंग शुल्क के नाम पर निर्धारित शिक्षण शुल्क का 60 प्रतिशत शुल्क वसूलने का प्रावधान किया है।
देवनानी ने कहा कि सत्र  उत्तराद्र्ध पर है परंतु सरकार ने सीबीएसई की कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों से 70 प्रतिशत जबकि आरबीएससी बोर्ड की कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों से 60 प्रतिशत शुल्क वसूलने का प्रावधान किया है। शिक्षण शुल्क पढाई दिवस के स्थान पर पाठ्यक्रम के आधार पर तय करना अव्यवहारिक है। आदेश हद से ज्यादा पैचिदा है तथा इस आदेश ने अभिभावकों को आंकड़ो के भॅवर में फंसा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार के फीस वसूली आदेश में केवल फीस वसूली का जिक्र किया गया है। संबंधित आदेश के क्रियान्वयन के लिए न कोई कमेटी का निर्माण करने की बात कही गई है और न आदेश नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।